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SWAMY VIVEKANAND MOTIVATIONAL STORY ABOUT GOAL IN HINDI विवेकानंद के विचार

SWAMY VIVEKANAND MOTIVATIONAL STORY ABOUT GOAL IN HINDI ( लक्ष्य तक कैसे पहुँचा जाएं )

विवेकानंद के विचार 

 "संभव की सीमा जानने का केवल 
एक ही तरीका है असंभव से भी 
आगे निकल जाना। "


एक बार स्वामी विवेकानंद के पास एक व्यक्ति जो अपनी जिंदगी से हताश हो चूका था। उसने स्वामी जी से कहा की स्वामी जी मैं हर रोज काफी मेहनत करता हूँ, काफी लगन से काम करता हूँ, लेकिन कभी भी सफल नहीं हो पाया। भगवान  ने मुझे ऐसा नसीब क्यों दिया है कि मै पढ़ा लिखा और मेहनती होते हुए भी कभी कामयाब नहीं हो पाया हूँ, धनवान नहीं हो पाया हूँ। 


"क्या तुम नहीं अनुभव करते कि दुसरो के ऊपर निर्भर रहना बुद्धिमानी नहीं है। 
बुद्धिमान व्यक्ति को अपने पैरो पर दृढ़ता पूर्वक खड़ा होकर कार्य करना चाहिए। 
धीरे धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा।



स्वामी जी ने उस व्यक्ति की परेशानी को समज लिया और कहा की मेरे पास एक पालतू कुत्ता है, जिसे तुम थोड़ी देर सैर कराके ले आओ तुम्हे तुम्हारे सवाल का जवाब मिल जायेगा। तब उस व्यक्ति को स्वामी जी के कार्य का मर्म समज में नहीं आया। उस व्यक्ति ने स्वामी जी की आज्ञा  का पालन किया। वह व्यक्ति पालतू कुत्ते को सैर कराके वापस लौट आया। कुत्ता बहुत ज्यादा थका हरा था पर उस व्यक्ति के चेहरे की चमक कम नहीं हुई। 

"पवित्रता, धैर्य और दृढ़ता ये तीनो सफलता के लिए आवश्यक है और सबसे ऊपर प्यार है। "


तभी तुरंत स्वामीजी ने सवाल  किया कि तुम्हारे साथ सैर करने वाला कुत्ता थक गया पर तुम तो बिलकुल ठीक हो तुम क्यों नहीं थके, तभी उस व्यक्ति ने जवाब दिया की मैं तो अपने रास्ते सीधे चल रहा था, पर कुत्ता गली के सारे कुत्तो के पीछे भाग रहा था, और लड़कर फिर वापस मेरे पास आजाता था। हम दोनों ने एक समान रास्ता तय किया है लेकिन फिर भी इस कुत्ते ने मेरे से कही ज्यादा दौड़ लगायी है इसलिए ये थक गया। 


                                 स्वामी जी ने मुस्कुराकर कहा की यही तुम्हारे सभी प्रश्नो का जवाब है।  तुम्हारी मंजिल तुम्हारे आस पास ही हैं वो ज्यादा दूर नहीं है लेकिन तुम मंजिल पे जाने की बजाय दूसरे लोगों के पीछे भागते रहते हो और अपनी मंजिल से दूर होते चले जाते हो।

    "वे अकेले रहते हैं,  जो दुसरो के लिए जीते हैं, बाकी जिंदा से ज्यादा मरे हुए है। "


SWAMY VIVEKANAND IN HINDI

एक युवा सन्यासी के रूप में भारतीय संस्कृति की सुगंध विदेशो में बिखेर ने वाले SWAMY VIVEKANAND साहित्य, दर्शन और इतिहास के प्रकाण्ड विद्वान थे।  स्वामी विवेकानंद ने 'योग', 'राजयोग ' तथा 'ज्ञानयोग' जैसे ग्रंथो की रचना करके युवा जगत को एक नयी राह दिखाई है जिसका प्रभाव जनमानस युगों - युगों तक छाया रहेगा।  कन्याकुमारी में निर्मित उनका स्मारक आज भी स्वामी विवेकानंद  - SWAMY VIVEKANAND महानता की कहानी बनता है।     


उठो, जागो और तब तक मत रुको
 जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।



स्वामी विवेकानंद ऐसी सोच वाले व्यक्ति थे, जिन्होंने आध्यात्मिक, धार्मिक ज्ञान के बल पर समस्त मानव जीवन को अपनी रचनाओं  माध्यम से सिख दी वे हमेशा कर्म पर भरोसा रखने वाले महापुरुष थे।  स्वामी विवेकानंद का मानना कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए तब तक कोशिश करते रहना चाहिए जब तक की लक्ष्य हासिल नहीं हो जाए। 


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