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AMBEDKAR MOTIVATIONAL STORY FOR STUDENTS IN HINDI आंबेडकर की जीवनी

AMBEDKAR MOTIVATIONAL STORY FOR STUDENTS IN HINDI

आंबेडकर की जीवनी 

         दोस्तों आज मैं आपको ऐसी एक महान हस्ती के बारे में बताने जा रहा हूँ, जिसने संविधान की रचना की हैं। 15 अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व में आई तो उसने आंबेडकर को देश के पहले कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।  


                         29 अगस्त 1947 को, आंबेडकर को स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना के लिए बनी संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। आंबेडकर एक बुद्धिमान संविधान विशेषज्ञ थे, उन्होंने लगभग 60 देशो के संविधानो का अध्ययन किया था।  आंबेडकर को "भारत के संविधान का पिता" के रूप में मान्यता प्राप्त है। इससे आप अनुमान लगा सकते है की आंबेडकर कितने बुद्धिमान व्यक्ति थे। आज मै आपको आंबेडकर के विषय में कुछ ऐसी बाते बताने जा रहा हूँ, जो आपको शायद ही पता हो। 

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आंबेडकर का प्रारंभिक जीवन 

आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के छोटे से गांव में हुआ।  उनका परिवार कबीर पंथ को माननेवाला मराठी मूल का था।  वे हिन्दू महार जाती से सम्बन्ध रखते थे, जो तब अछूत कही जाती थी और इस कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव सहन करना पड़ता था।  भीमराव आंबेडकर के पूर्वज लम्बे समय से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत रहे थे, और उनके पिता रामजी सकपाल, भारतीय सेना की महू छावनी में सेवारत थे तथा यह काम करते हुए वे सूबेदार के पद तक पहुंचे थे। उन्होंने मराठी और अंग्रेजी में औपचारिक शिक्षा प्राप्त की थी। 

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आंबेडकर ( छुआछूत का विरोध )

आंबेडकर ने छूआछत, जातिगत भेदभाव का खुल कर विरोध किया, क्यों की उन्होंने इसे झेला था।  वे कदापि नहीं चाहते थे, आने वाली पीडी को इसका सामना करना पड़े।  आंबेडकर ने बॉम्बे हाई कोर्ट में विधि का अभ्यास करते हुए, उन्होंने अछूतो की शिक्षा को बढ़ावा देने और उन्हें ऊपर उठाने का प्रयास किया।                                                               


सन 1927 तक डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर ने छुआछूत के विरुद्ध एक व्यापक एवं सक्रिय आंदोलन आरम्भ करने का निर्णय किया।  उन्होंने सार्वजनिक आंदोलनों, सत्याग्रहों और जुलूसों के द्वारा, पेयजल के सार्वजनिक संसाधन समाज के सभी वर्गों के लिए खुलवाने के साथ ही उन्होंने अछूतो को भी हिन्दू मंदिरो में प्रवेश करने का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया। 

      आंबेडकर "बहुत सरे देवता आए और गए पर अछूत की भावना लोगों के मन से नहीं गयी।" 




दलितों के मसीहा 

डॉ बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा " मै संविधान की अच्छाइया गिनाने नहीं जाऊंगा, क्यूंकि मुझे लगता है कि संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो वो अंततः बुरा साबित होगा।   अगर उसे इस्तेमाल में लाने वाले लोग बुरे होंगे, और संविधान कितना भी बुरा हो अगर उसे इस्तेमाल में लाने वाले लोग अच्छे होंगे तो वह संविधान अच्छा साबित होगा।

डॉ बाबा साहेब आंबेडकर ने भारत के सभी राजनितिक दलों को भारत में एकता के विषय को लेकर आगाह किया था।  


            और  कहा था की  "26 जनवरी,1950 को भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र होगा।  लेकिन उसकी स्वतंत्रता का भविष्य क्या है ? क्या वह अपनी स्वतंत्रता बनाये रखेगा या फिर से खो देगा ? मेरे मन में आने वाला यह पहला विचार है। 26 जनवरी, 1950  को भारत एक प्रजातान्त्रिक देश बन जायेगा कि उस दिन से भारत में जनता की जनता द्वारा और जनता के लिए बनी एक सरकार होगी। ..... क्या भारत अपने प्रजातांत्रिक संविधान को बनाये रखेगा या उसे फिर से खो देगा ? मेरे मन में आने वाला यह दूसरा विचार है और यह भी पहले विचार जितना ही चिंताजनक है। 



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